बुधवार, 16 नवंबर 2016

जनता प्रसन्न, विपक्ष परेशान क्यों?

 केन्द्र  सरकार के नोटबंदी के निर्णय को आम आदमी सकारात्मक ढंग से ले रहा है। लेकिन, विपक्षी दलों के नेताओं की तकलीफ समझ पाना मुश्किल हो रहा है। वह कह रहे हैं कि लोग परेशान हो रहे हैं, लोगों को बैंक और एटीएम में कतार में लगना पड़ रहा है। छोटे नोट की कमी के कारण जनता हलाकान हो रही है। यह सच है कि जनता परेशान हो रही है। लेकिन, उसकी परेशानी देश से बड़ी नहीं है। यह बात आम आदमी जानता है। इसलिए कतार में खड़ा देशभक्त आदमी कह रहा है कि वह राष्ट्रहित के लिए थोड़ी-बहुत परेशानी उठाने के लिए तैयार है। सरकार के निर्णय का समर्थन करने के लिए अनेक स्वयंसेवी कार्यकर्ता भी जरूरतमंदों की मदद के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। यह लोग बैंक से पैसा निकालने में लोगों की मदद कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपानीत सरकार का विरोध करने को अपना धर्म समझने वाले आम आदमी पार्टी के सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी, बसपा प्रमुख मायावती और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी सामान्य व्यक्ति की भावना को समझने में भूल कर रहे हैं। इसे समझने के लिए इन दलों और नेताओं को 'इनशॉर्ट' की ओर से कराए गए सर्वेक्षण का अध्ययन करना चाहिए।
 
         इनशॉर्ट ने शोध के लिए प्रसिद्ध और सिद्ध अंतरराष्ट्रीय संस्था 'आईपीएसओएस' के सहयोग से पाँच लाख लोगों के बीच 'देश की नब्ज' टटोलने के लिए सर्वेक्षण कराया। इस सर्वेक्षण में 82 प्रतिशत लोगों ने नोटबंदी के निर्णय का स्वागत किया है। वहीं, 84 प्रतिशत लोग मानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार कालेधन को रोकने के लिए गंभीर है। इसका स्पष्ट मतलब है कि देश सरकार के साथ खड़ा है। जबकि मोदी विरोध से पीडि़त नेता जनता की इस राय के विपरीत उल-जलूल बयानबाजी कर रहे हैं। राहुल गांधी रुपये निकालने के लिए एटीएम पहुंच गए। इसे नौंटकी से अधिक क्या माना जाना चाहिए? वहीं, केजरीवाल प्रधानमंत्री पर आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा के नेताओं और मोदीजी के मित्रों ने अपने नोट पहले ही बदल लिए हैं। जबकि हकीकत यह है कि इससे पहले इतनी गोपनीयता से इतने बड़े कदम नहीं उठाए गए हैं। नोटबंदी का यह निर्णय बेहद गोपनीय रहा। इसके लिए केंद्र सरकार की सराहना की जानी चाहिए। अरविंद केजरीवाल को दिल्ली में लक्ष्मीनगर की जनता ने नारेबाजी करके बता दिया कि वह गलत सोच रहे हैं, जनता पूरी तरह से मोदी सरकार के साथ है। वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी यह नोटबंदी देशहित में दिखाई नहीं दे रही हैं। उन्हें अपने ही राज्य में एक सर्वेक्षण करना चाहिए कि नोटबंदी पर बंगाल की जनता की क्या प्रतिक्रिया है? ममता बनर्जी को संभवत: पता नहीं कि बंगाल की जनता फर्जी नोट से आतंकित है, उसे सरकार के इस निर्णय से काफी राहत मिली है। 
            बहरहाल, आज से संसद सत्र प्रारंभ हो रहा है। प्रतिपक्ष इस मसले पर केंद्र सरकार को सदन में घेरने की योजना बना रहा है। यदि विपक्ष ऐसा करता है, तब वह जनता के बीच रहा-सहा विश्वास भी खो देगा। प्रतिपक्ष को समझना चाहिए कि प्रत्येक मसले पर सरकार का विरोध करना सही राजनीति नहीं है। देशहित के जुड़े मुद्दों पर सरकार के साथ खड़े होना भी राजनीति का हिस्सा है।  

1 टिप्पणी:

  1. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ..... very nice ... Thanks for sharing this!! :) :)

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