मंगलवार, 20 सितंबर 2016

शहीदों के परिजनों की सुनो सरकार

 उड़ी  हमले से देश गमगीन है। देशभर में शहीद जवानों को श्रद्धासुमन अर्पित किए जा रहे हैं। शहीद जवान जिस गाँव/शहर/राज्य के बेटे थे, वहाँ के सभी नागरिक बंधु इस दु:ख की घड़ी में उनके परिवारों के साथ खड़े हैं। इस मुसीबत की घड़ी में परिवार के परिवार बिलख रहे हैं। शहीदों की विधवाएं, उनके बच्चे, माता-पिता, बहन-भाई सब एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि हमारे सोते हुए सैनिकों पर हमला करने वाले कायर पाकिस्तान को जवाब कब और कैसे दिया जाएगा? यह सवाल सिर्फ शहीदों के परिजन ही नहीं पूछ रहे, बल्कि यह प्रश्न आम नागरिकों का भी है। शहीद नायक एसके विद्यार्थी की बेटी ने कहा है कि सुरक्षा बलों पर जिन लोगों ने हमला किया है, उन्हें माकूल जवाब दिया जाना चाहिए। वहीं, शहीद अशोक की पत्नी अपने पति की मौत के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराते हुए वह कहती हैं कि पाकिस्तान तो कुत्ता है, उसके बारे में इससे ज्यादा क्या कहूं। शहीद जी. दलाई के पिता ने भी हमले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। जबकि शहीद जवान नायमन कुजूर की पत्नी वीणा अपने पति की मौत का बदला चाहती है। वीणा ने कहा है कि ऐसा लग रहा है कि मैं खुद जाऊं और आतंकियों को गोली मार दूं। वह चाहती है कि सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी ऐसा कृत्य करने का साहस नहीं जुटा सके।
             शहीदों के परिवारों की इन भावनाओं को वे लोग नहीं समझ सकते, जिनके लिए राष्ट्र पहले नहीं है। जम्मू-कश्मीर में पैलेट गन का विरोध करने वाला, जेएनयू में देशद्रोही नारेबाजी करने वालों के साथ खड़े होकर अभिव्यक्ति की आजादी की माँग करने वाला और असहिष्णुता की मुहिम चलाने वाला समूचा तथाकथित बौद्धिक जगत इस हमले पर खामोश बैठा है। उनके मुंह से शहीदों के प्रति संवेदना के दो बोल भी नहीं फूटे हैं। जब समूचे देश को एकजुट होकर शहीदों के परिवार को हौसला देना चाहिए और उचित निर्णय लेने में सरकार की मदद करनी चाहिए, उस वक्त भारतीय राजनीति के विदूषक आतंकी हमले के लिए केन्द्र सरकार में शामिल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को दोष देने के लिए कुतर्क गढ़ रहे हैं। उरी हमले के पीछे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हाथ होने के समाचार आने के बाद तथाकथित देश की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी पार्टी (स्वयंभू) के महासचिव कहते हैं कि 1999 में विमान अपहरण कांड में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी मसूद अजहर को छोडऩा एनडीए की सबसे बड़ी गलती थी। राजनेताओं को कम से कम इतना तो शऊर होना चाहिए कि कब, किस तरह की बात करनी चाहिए। एक आतंकी के लिए क्या सैकड़ों आम नागरिकों का जीवन दांव पर लगा देना उचित होता? जम्मू-कश्मीर की समस्या किस राजनीतिक नेतृत्व की देन है? इन प्रश्नों का जवाब राजा साहब दे सकते हैं? 
            घटिया राजनीति में पड़े हम लोगों को दु:ख की इस घड़ी में भी शहीदों के घर से आ रहे साहस के बोल सुनने चाहिए। उनके दर्द को समझना चाहिए। वर्तमान सरकार ने इस घटना के बाद काफी लम्बा विमर्श किया है। पाकिस्तान को जवाब देने के लिए प्रत्येक प्रकार की रणनीति पर चर्चा की है। सबसे पहले भारत की ओर से संंयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन में पाकिस्तान को आतंकी राष्ट्र घोषित कराने का प्रयास किया जाएगा। पाकिस्तान को अलग-थलग करने का प्रयास सरकार और तेजी से करेगी। पाकिस्तान को जमीन दिखाने के लिए भारत को उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की माँग करनी चाहिए। बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वर्तमान सरकार से अधिक उम्मीद हैं। सरकार को इस बार ठोस कदम उठाने ही चाहिए और उन ठोस कदमों की आवाज देशवासियों को सुनाई भी देनी चाहिए। 

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