शनिवार, 25 जुलाई 2015

किसानों को महज वोट बैंक न समझें

 प्र धानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारतीय कृषि अनुसंधान की ओर से कृषि विकास के लिए तैयार किए गए 'विजन-2050' का विमोचन 25 जुलाई को पटना में करेंगे। 'विजन-2050' कृषि क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन के लिए है। विजन-2050 किसानों के लिए कितना कारगर साबित होगा, यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा है। फिलहाल, तो भारतीय जनता पार्टी का पूरा ध्यान बिहार चुनाव पर केन्द्रित है। हाल ही में बिहार विधान परिषद के चुनाव में भाजपा ने शानदार जीत हासिल की थी। इस जीत से भाजपा की उम्मीदों को पंख लग गए हैं। सेमीफाइनल माने गए इस चुनाव के परिणाम को भाजपा फाइनल (बिहार विधानसभा चुनाव) में भी दोहराना चाहती है। बिहार विजय के लिए 25 जुलाई को ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 'परिवर्तन रैली' का शुभारम्भ कर मिशन 185+ का बिगुल भी फूंकेंगे। इसके बाद श्री मोदी पटना पहुंचकर विजन-2050 का विमाचन करेंगे। कहीं न कहीं, विजन-2050 के विमोचन के लिए पटना को चुनना, बिहार के किसानों को अपनी ओर आकर्षित करने का एक रणनीतिक फैसला है।
        बिहार चुनाव प्रत्येक पार्टी के लिए अहम हैं। कांग्रेस बिहार चुनाव में अच्छी जीत से अपना खोया हुआ आत्मविश्वास पाना चाहेगी। लालू यादव के सामने तो अपनी राजनीतिक जमीन बचाने का ही संकट खड़ा है। वहीं, नीतिश कुमार साबित करना चाहते हैं कि वे ही बेहतर मुख्यमंत्री हैं और भाजपा से अलग होना सही फैसला था। भाजपा के सामने कई उद्देश्य हैं। दिल्ली चुनाव में पार्टी को जिस तरह हार का सामना करना पड़ा, बिहार जीतकर वह उस हार को पीछे छोडऩा चाहती है। नीतिश और मोदी के बारे में भी सब जानते हैं। दोनों की प्रतिष्ठा भी चुनाव की हार-जीत से जुड़ी हैं। इसलिए प्रत्येक पार्टी मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। यही कारण है कि भूमि अधिग्रहण विधेयक को भी केन्द्र सरकार ने ठण्डे बस्ते में डाल दिया है। क्योंकि, विपक्ष ने विधेयक को किसान विरोधी प्रचारित कर दिया है। विजन-2050 के विमोचन समारोह से भाजपा अपने पर किसान विरोधी विधेयक लाने की तोहमत को हटाकर खुद को किसान हितैषी बताने की कोशिश करेगी। 
       बहरहाल, एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जिस तरह आजादी के बाद से 'गरीबी हटाओ' नारे तो खूब लगाए गए, प्रत्येक सरकार ने संकल्प भी लिया लेकिन गरीबी हटी नहीं। ठीक उसी तरह क्या कारण हैं कि किसानों और कृषि क्षेत्र के विकास की बात सब सरकारें करती आई हैं लेकिन असल में किसानों का उत्थान कोई नहीं कर सका है? जिस तरह कुछ पार्टियां अल्पसंख्यकों को वोटबैंक की तरह देखती और इस्तेमाल करती हैं, क्या उसी तरह किसानों के साथ प्रत्येक राजनीतिक दल व्यवहार करते हैं? वोट पाने के लिए किसानों की फिक्र करना, वोट पाकर किसानों का भूल जाना। किसानों की बुनियादी समस्याओं को समझकर उन्हें सुलझाने की कोशिश कब होगी? क्या विजन-2050 में किसान और कृषि क्षेत्र के विकास के लिए जमीनी खोज-पड़ताल की गई है? छोटे किसान कम जमीन में कैसे अच्छी और अधिक उपज प्राप्त कर सकते हैं, इस बारे में उन्हें कैसे बताया जा सकता है? क्या छोटे-बड़े किसानों के लिए भविष्य की योजनाएं तलाशी गई हैं? क्या खेती के तरीकों पर विचार किया गया है? किसानों को उन्नत और आधुनिक तरीके से खेती करने का प्रशिक्षण देने के लिए किसी योजना का विचार किया गया है क्या? जैविक और परंपरागत खेती को बढ़ावा देना है या नहीं, इस बारे में कुछ तय हुआ है क्या? खेती से जुड़े लघु और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने और किसानों को इसके लिए प्रशिक्षित करने का कोई विजन है क्या? ऐसे अनेक सवाल हैं, जिनका जवाब खोजे बिना कृषि विकास शायद संभव नहीं होगा। खेती और किसान का भला तब तक भी नहीं हो सकता जब तक उसके गांव के विकास की दिशा तय नहीं होती। गांव से शहरों की ओर हो रहे पलायन का भी समाधान खोजना होगा। गांव-किसान-खेती इन सबका सम्मिलित विचार करना जरूरी है। 
       किसान सिर्फ वोट बैंक नहीं, बल्कि हमारे अन्नदाता हैं। उनकी अनदेखी उचित नहीं है। सरकारों, उनके वादों और उनकी हवा-हवाई योजनाओं से किसानों की उम्मीदें टूटती जा रही हैं। इस सरकार ने अच्छे दिन लाने का वादा किया था। इसमें कोई दो राय नहीं कि कुछ क्षेत्रों में अच्छे दिनों की आहट सुनाई देने लगी है। किसानों को भी उनके अच्छे दिनों का इंतजार है। स्वाधीनता के बाद अब तक कोई सरकार किसानों के लिए ठोस संरचना खड़ी नहीं कर सकी है। भाजपानीत केन्द्र सरकार से किसानों को बहुत उम्मीद है। बाकि सरकारों की तरह मोदी सरकार कोरी योजनाएं न लाए बल्कि कुछ ठोस विजन प्रस्तुत करे। आखिर में सभी दलों के लिए चिंतन का बिन्दु है- 'किसान महज वोट बैंक नहीं है।'

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