सोमवार, 20 जुलाई 2015

पाकिस्तान को रिश्तों में मिठास पसंद नहीं

 पा किस्तान अपनी छवि को सुधारने के लिए भारत को विश्वमंच पर लगातार गलत साबित करने का प्रयास करता रहा है। लेकिन, पाकिस्तान के हुक्मरानों और सेना शायद यह समझने को तैयार नहीं है कि किसी को गलत साबित करके खुद को अच्छा साबित नहीं किया जा सकता है। खुद को 'सज्जन' स्थापित करने के लिए तो 'सज्जनता' का प्रगटीकरण करना पड़ता है। सज्जन होने के लिए अच्छा आचरण जरूरी है। पाकिस्तान के सामने सज्जनता और सद्आचरण प्रकट करने के अनेक अवसर भारत उपलब्ध कराता है लेकिन उन सब मौकों पर वह अपना वास्तविक रंग ही दिखाता है। इस ईद के मौके पर भी पाकिस्तान सेना ने भारतीय सेना की ओर से दी गई मिठाई अस्वीकार करके छोटी सोच का प्रदर्शन किया है। पाकिस्तान ने संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए पवित्र त्योहार के मौके पर सीमावर्ती इलाकों में गोलाबारी की है। इसके बावजूद सारा तनाव भुलाकर भारत ने बड़प्पन दिखाते हुए ईद की मिठाई पाकिस्तान की ओर बढ़ाई थी। लेकिन, पाकिस्तान को शायद रिश्तों में मिठास पसंद नहीं है। प्यार-मोहब्बत से साथ-साथ जीना-बढऩा शायद उसकी फितरत में ही नहीं है।
         सेना के वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि पुंछ और राजौरी सेक्टर के दो गांवों (जुट्रियन और कस्बा) में ईद मना रहे भारतीय मुस्लिमों और अन्य ग्रामीणों पर पाकिस्तानी सेना ने ८२ एमएम के गोले दागे, आरपीजी पीका एवं एमएमजी जैसे हथियारों से फायरिंग की। इस गोलाबारी में तीन महिलाओं सहित पांच लोग घायल हुए हैं। भारतीय मुसलमानों को पाकिस्तान की तरफ से यह नापाक ईदी भेजी गई। पाकिस्तान की इस नापाक हरकत की जितनी निंदा की जाए, कम है। पाकिस्तान से संबंध सुधारने की दिशा में प्रयास करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी तक सब धोखा खा चुके हैं। बार-बार पाकिस्तान से छले जाने पर भी भारत ने अपने प्रयासों में कमी नहीं की है। अब भी भारत चाहता है कि कैसे भी संबंध दोस्तानां हो जाएं। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल और विचारकों 'पाक पर मोदी नीति' का उपहास उड़ा रहे हैं। इसके बावजूद भारत-पाक संबंधों में चासनी घोलने के लिए वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी परम्परागत नीति पर ही आगे बढ़ रहे हैं। यह जरूरी भी है। हालांकि, सीमापार से होने वाली घुसपैठ और गोलाबारी का माकूल जवाब देना अब भारत ने भी शुरू कर दिया है। पिछले दिनों सेना ने इस बात के संकेत भी दिए थे कि अब बहुत कुछ बदल गया है। हम थोड़े से खुल गए हैं। दुश्मन की ईंट का जवाब पत्थर से दे पा रहे हैं। लेकिन, बात वही है कि भारतीय मानस शांति और सह-अस्तित्व के साथ जीना पसंद करता है। इसलिए सेना का मानस भी वैसा ही है। भारतीय सेना मानवीय संवेदनाओं से भरी है। सैनिकों के 'सिर काटने' जैसी नृशंस हरकत कभी भी भारतीय सेना ने नहीं की। कारगिल युद्ध के बाद पाकिस्तान अपने सैनिकों के शव लेने को भी तैयार नहीं था तब भी भारतीय सेना ने उनका विधिवत अंतिम संस्कार किया। भारतीय सेना ने कभी भी पाकिस्तान के आम लोगों पर फायरिंग की हो, ऐसी भी कोई घटना याद नहीं आती है। 
         छोटे-छोटे लेकिन महत्वपूर्ण पलों में जैसा व्यवहार भारत-पाकिस्तान करते हैं, उसी के आधार पर उनकी छवि अच्छी-बुरी बनती है। त्योहार के मौके पर मिठाई का आदान-प्रदान करने की परंपरा सीमा पर लम्बे समय से चली आ रही है। यह दूसरा अवसर है जब मिठाई का आदान-प्रदान नहीं हो सका है। पहली बार भी पाकिस्तान ने ही मिठाई लौटाई थी। इस घटना से फिर यही साबित होता है कि पाकिस्तान रिश्तों में मिठास नहीं चाहता है। 'चीनी ड्रोन' की बहाने भी पाकिस्तान ने विश्वमंच पर भारत की छवि को धक्का पहुंचाने का प्रयास किया। लेकिन, झूठ एक दिन भी खड़ा नहीं रह सका, सच सबके सामने आ गया। पाकिस्तान फिर शर्मसार हुआ। मुम्बई हमले के मास्टरमाइंड लश्कर-ए-तोइबा के ऑपरेशन कमांडर जकी-उल-रहमान लखवी के मामले में भी पाकिस्तान का नकाब उतर रहा है। बहरहाल, पाकिस्तान के हुक्मरानों और सेना को समझना होगा कि छोटे दिल से बात नहीं बनेगी। दिल बड़ा करना होगा। शांति से रहने में दोनों का फायदा है। वरना दोनों आपसी झगड़े में खुद का नुकसान करते रहेंगे, तीसरे देश फायदा उठाएंगे। इसलिए पाकिस्तान भविष्य में भारत की ओर से भेजी गई मिठाई स्वीकार करे और दोस्ती के लिए बढ़ाए गए हाथ को भी ईमानदारी से थामे। अच्छे पड़ोसी और सच्चे दोस्त होकर ही दोनों देश विकास के पथ पर आगे बढ़ सकते हैं।

8 टिप्‍पणियां:

  1. जिस देश की नींव ही कड़वाहट पे रखी गई है वहाँ मिठास कैसे टिकेगी, और कितने दिन दिखेगी?

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (22-07-2015) को "मिज़ाज मौसम का" (चर्चा अंक-2044) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं

यदि लेख पसन्द आया है तो टिप्पणी अवश्य करें। टिप्पणी से आपके विचार दूसरों तक तो पहुँचते ही हैं, लेखक का उत्साह भी बढ़ता है…

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails