बुधवार, 11 अगस्त 2010

कपटी लोगों का धर्म इस्लाम

चर्च में जलाई जाएंगी कुरान
बर है कि फ्लोरिडा के एक चर्च में ११ सितंबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुरान को जलाने (इंटरनेशनल बर्न ए कुरान डे) के दिवस के तौर पर मनाया जाएगा। न्यूयॉर्क के समाचार पत्रों के अनुसार ११ सिंतबर २००१ को हुए आतंकी हमले की घटना की नौवीं बरसी पर चर्च ने यह कदम उठाने का फै सला लिया है। फ्लोरिडा के 'द डोव वल्र्ड आउटरीच सेंटरÓ में ९/११ की बरसी पर एक शोक सभा आयोजित की जाएगी। जिसके तहत इस्लाम को कपटी और बुरे लोगों का धर्म बताकर कुरान को जलाया जाएगा।
संसद में उछला मुद्दा
चर्च द्वारा कुरान की प्रतियां जलाने के बारे में अमरीकी चर्च की घोषणा के मुद्दे को ९ अगस्त सोमवार को लोकसभा में उठाते हुए इस पर चर्चा कराए जाने की मांग की गई। बसपा डॉ. शफीकुर रहमान बर्क ने इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के समक्ष इस मसले को रखना चाहिए। भारत और दुनिया के मुसलमान अपने पवित्र धर्मग्रंथ के किसी भी तरह के अपमान को बर्दाश्त नहीं कर सकते।
नोट:- इस महाशय ने कभी-भी उस वक्त आपत्ति दर्ज नहीं कराई, जब मुस्लिमों द्वारा कई बार बीच सड़क पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज जलाए। लगता है ये देश का अपमान बर्दाश्त कर सकते हैं... साथ ही इन्हें दूर देश में क्या हो रहा है इस बात की तो चिंता रहती है, लेकिन अपने देश में सांप्रदायिक ताकतें क्या गुल खिला रही हैं यह नहीं दिखता।
कुरान- इस्लाम धर्म के प्रवर्तक हजरत मुहम्मद साहब थे। इनका जन्म अरब देश के मक्का शहर में सऩ ५७० ई में हुआ था। अपनी कट्टर सोच के कारण इन्हें अपनी जान बचाने के लिए मक्का से भागना पड़ा। इस्लाम के मूल हैं-कुरान, सुन्नत और हदीस। कुरान वह ग्रंथ है जिसमें मुहम्मद साहब के पास ईश्वर के द्वारा भेजे गए संदेश संकलित हैं। कुरान का अर्थ उच्चरित अथवा पठित वस्तु है। कहते हैं कुरान में संकलित पद (आयतें) उस वक्त मुहम्मद साहब के मुख से निकले, जब वे सीधी भगवत्प्रेरणा की अवस्था में थे।
मुहम्मद साहब २३ वर्षों तक इन आयतों को तालपत्रों, चमड़े के टुकड़ों अथवा लकडिय़ों पर लिखकर रखते गए। उनके मरने के बाद जब अबूबक्र पहले खलीफा हुए तब उन्होंने इन सारी लिखावटों का सम्पादन करके कुरान की पोथी तैयार की, जो सबसे अधिक प्रामाणिक मानी जाती है।
ईसाइयों से विरोध
कुरान सबसे अधिक जोर इस बात पर देती है कि ईश्वर एक है। उसके सिवा किसी और की पूजा नहीं की जानी चाहिए। हिन्दुओं से तो इस्लाम का सदियों से सीधा विरोध है। हिन्दू गौ-पालक और गौ-भक्त हैं तो मुस्लिम गौ-भक्षक, हिन्दू मूर्ति पूजा में विश्वास करते हैं तो इस्लाम इसका कट्टर विरोधी है। ईसाइयों से भी उसका इस बात को लेकर कड़ा मतभेद है कि ईसाई ईसा मसीह को ईश्वर का पुत्र कहते हैं। कुरान का कहना है कि ईसा मसीह ईश्वर के पुत्र कतई नहीं हो सकते, क्योंकि ईश्वर में पुत्र उत्पन्न करने वाले गुण को जोडऩा उसे मनुष्य की कोटि में लाना है।
दोनों से भला हिन्दुत्व
कुछ लोगों को हिन्दुत्व से बड़ी आपत्ति है, लेकिन मैं भगवान का शुक्रिया अदा करता हूं कि मैं हिन्दू जन्मा। हिंदू होने के नाते मुझे सभी धर्मों का आदर करने की शिक्षा मिली है। मैं मंदिर जा सकता हूं, मस्जिद और दरगाह पर श्रद्धा से शीश झुका सकता हूं और चर्च में प्रार्थना भी कर सकता हूं। जिस तरह से एक आतंककारी घटना से ईसाइयों में इस्लाम के प्रति इतना क्रोध है कि कुरान को चर्च में जलाने का निर्णय ले लिया। इससे तो हिन्दू भले हैं। हिन्दुओं ने तो मुगलों के अनगिनत आक्रमण और आंतकी हमले झेले हैं, लेकिन कभी भी कुरान जैसे ग्रंथ को जलाने का निर्णय नहीं लिया। भले ही इस देश के मुसलमान सड़कों पर यदाकदा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को जलाते रहे हों या फिर राष्ट्रगीत वन्देमातरम् के गाने पर एतराज जताते हों।
                असल में इस्लाम और ईसाई दोनों ही धर्म अति कट्टर हैं। वे अपने से इतर किसी अन्य धर्म की शिक्षाओं को न तो ठीक मानते हैं और न उनका आदर करते हैं। एक ने अपने धर्म का विस्तार तलवार की नोक पर किया तो दूसरे ने लालच, धोखे और षडय़ंत्र से भोले-मानुषों को ठगा। खैर चर्च में कुरान जलाने का मसला तूल पकड़ेगा। इसके विरोध में पहली प्रतिक्रिया भारतीय संसद में हो चुकी है।

8 टिप्‍पणियां:

  1. इंटरनेशनल बर्न ए कुरान डे??????
    ye to galat baat hai... chahe aap apne liye kuch kare na kare .. magar doosron ki bhaawanao ko dukh pahunchana jaayaj baat to nahi hai na...ye bilkul galat hai..

    Banned Area News : Fat employees take more time off work

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  2. लोकेंद्र जी...आपका बतवा कुछ ठीक है कुछ कम ठीक है... इस बात के बहस में पड़ना हमरे ज्ञान के बाहर है... धर्म का प्रचार और प्रसार सिर्फ हिंदुत्व के अलावा सभी धर्मों ने किया है.. असोक जब बौद्ध धर्म अपनाया तो इतिहास के किताब में लिखा है कि चारो दिसा में प्रचार किया.. आज भी जहाँ ई धर्म है ऊ असोक के कारन है...हिंदु धर्म बास्तव में धर्म नहीं एक जीवन दर्सन है इसलिए इसको पब्लिसिटी का जरूरत नहीं है!!

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  3. मुस्लिम गौ-भक्षक.....ये एक लाइन से में पूरी तरह से इत्फाक नहीं रखता....कई मुसलमान है जिन्होने गाय की इज्जत की है। करते हैं। ठीक उसी तरह जैसे हम......हम उसे गाय को बहुउपयोगी होने के कारण मां समान दर्जा देते हैं। ये भावना ही बाद में धर्म में जोड़ दी गई। वरना ऐसा कौन सा जानवर है जिसका मल एंटीबायोटिक हो। घर के आंगन को गोबर से निरंतर लीपने से कई तरह के कीटाणुओं का नाश हो जाता है। गोपालक को टीबी नहीं होती। गौ मूत्र का पूरा साइंस है। गौ पर पूरी तरह से वैज्ञानिक शौध हो रहे हैं। अगर कोई इसे नहीं जातना तो उससे कहना कि अपना दिमाग ठीक कराए औऱ आंखे खोले......

    बाकी रहे नेता साहब.....तो इनके जैसे लोगो को राष्ट्रीय ध्वज का मतलब पता भी है। ये खुद को तो रहनुमा बना देंगे....मगर मायावती के शासन के जो चंद अच्छे काम हैं उन्हें भी बर्बाद कर देंगे। कश्मीर से हिंदुओं को औरंगजेब भगा नहीं सका....मगर पिछले बीस साल में घाटी हिंदूविहिन सी हो गई है. पर इन्हें कभी याद नहीं आएगी। बेशर्म है ऐसे लोग। जो काम अमेरिका में हो रहा है उसका विरोध उन्हें करने दो। ये जबरदस्ती वहां जाकर टांग अड़ाएंगे....ठीक खिलाफत आंदोलन की तरह....

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  4. आपने तो बहुत गंभीर समस्या के बारे में लिखा है जिसका विचार करना ज़रा मुश्किल है! पर मेरा ये मानना है कि जैसे हम हिन्दू हैं और हमें अपने धर्म से प्यार है उसी तरह सभी को अपने अपने धर्म से भी प्यार होगा !

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  5. lokendra ji aapki di post se padh kar hi ye jaankaari mili.par mere vichar se sabhi ko apne dhrmo se pyaaar hota hai.par jo in sabhi darmon se upar uth jaaye, sabhi ko samaan roop se swikaar karen vahi sabse bada dharm hai.aur sahi arth me vo ek sachcha insaan hai jo insaaniyat se bharpuur hota hai.
    poonam

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  6. लोकेन्द्र जी आलेख की मूल भावना से सहमत हूँ | जिस प्रकार लोहे को लोहा ही काटता है उसी प्रकार एक कट्टर धर्म को दुसरा कट्टर धर्म वाला ही टक्कर दे सकता है |

    जहाँ तक शफीकुर रहमान बर्क जैसे लोग हैं तो ऐसे लोगों की निष्ठा भारत की अपेक्षा इस्लाम या इस्लामिक देशों में ज्यादा रही है |

    बिहारी बंधू के कथन - "हिंदु धर्म बास्तव में धर्म नहीं एक जीवन दर्सन है इसलिए इसको पब्लिसिटी का जरूरत नहीं है!!" से बिलकुल सहमत नहीं हूँ | इस तरह की बातें कुछ सेकुलर लोग हिन्दू धर्म का विनास करने के लिए कर रहे हैं | वैसे हिन्दू शब्द थोड़ा संकुचित है वास्तव में सनातन धर्म पूर्ण है और आज के समय में इसके प्रचार-प्रसार की शक्त आवश्यकता है | यदि सनातन धर्म का प्रचार प्रसार नहीं किया गया तो आने वाले समय में सनातन सभ्यता/धर्म भी उनानियों के तरह इतिहास के गर्त में दबा होगा |

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