शनिवार, 30 जनवरी 2010

गोडसे की गोली से नहीं मरे गांधी जी

सर्वप्रथम गांधीजी को विनम्र श्रद्धांजलि....
भारत में कई महापुरुषों की मृत्यु विवादास्पद है। जैसे- नेताजी सुभाषचंद्र बोस, लालबहादुर शास्त्री, पं. दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और महात्मा गांधी.............
 प्रो. कुसुमलता केडिय़ामैं अगस्त के महीने में जबलपुर था। नई दुनिया में इंटर्नशिप कर रहा था। उसी दौरान सुबह फाइल पढ़ते समय मैंने एक प्रसिद्ध गांधीवादी चिन्तक  कुसुमलता केडिय़ा का इंटरव्यू पढ़ा। गांधी विद्या संस्थान, वाराणसी की निदेशक हैं प्रो. कुसुमलता केडिय़ा। सुश्री केडिय़ा समाज विज्ञानी व अर्थशास्त्री भी हैं। हां तो उनका इंटरव्यू नई दुनिया के ११ अगस्त २००९ के अंक में छपा था। वे इंदौर प्रवास पर थीं तभी नई दुनिया ने उनका इंटरव्यू किया था। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति महात्मा गांधी के शरीर में लगी गोलियां गोडसे के रिवाल्वर की नहीं थी बल्कि बंदूक की थी। अदालत ने अपने फैसले में इस बात का उल्लेख किया है। अदालत के फै सले में इस बात का उल्लेख गांधी जी की हत्या पर कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि गोडसे की अदालत के समक्ष स्वीकारोक्ति भी कानूनीरूप से वैध नहीं है। साथ ही इस हत्याकांड में चश्मदीद गवाह के परीक्षण में मनु और आभा की गवाही भी नहीं हुई थी। कुछ इस तरह के तथ्यों का उल्लेख इंटरव्यू में करके उन्होंने कई प्रश्र खड़े किए हैं. जिनकी तह तक जाना जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि वे चाहती हैं कि गांधी हत्या के सच को सामने लाया जाए, उस संदर्भ में जांच की जानी चाहिए। ऐसा हो क्यों नहीं रहा यह भी बड़ा सवाल है। उनका विस्तृत इंटरव्य आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं।

3 टिप्‍पणियां:

  1. गांधी जी की हत्या जिस गोली से हुई वह गोली बरामद कर ली गई थी आज भी वह गोली राजघाट स्थित गांधी संग्रहालय में रखी हुई है गांधी जी के खून के बिगडे वस्त्र भी वहंा मौजूद हैं। गांधी जी को गोली मारने के बाद नाथूराम गोडसे ने यह स्वीकार किया था कि उसने ही गांधी जी को गोली मारी है। प्रो. केडिया द्वारा अब इस तरह के तथ्य पेश कर क्या साबित करना चाहती हैं। डा. केडिया जिस हवाले से ये सब कह रही हैं उसकी सत्यता में ही संदेह है साक्षातकार लेने वाले पत्रकार के पहले सवाल का जबाव में उन्होंने इस बात का जिक्र किया है। गांधी हत्या के समय एक अखबार में छपी खबर का वे हवाला दे रहीं है। जरा ये भी बतातीं कि वह अखबार कौन सा था. वह किस पत्रकार की रिपोर्ट थी। डा. केडिया और ब्लाग के लेखक की जानकारी के लिए बतादूं कि कुलदीप नैयर साहब ने गांधी जी की हत्या होने के तुरंत बाद मौका के वारदात पर पहुंचकर एक्सप्रेस के लिए रिपोर्टिग की थी जो उनके संस्मरण स्कूप में पढऩे को मिल जाएगी।

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  2. दर असल गांधी की ह्त्या तो रोजाना उनकी ही (नाजायाज) संताने और कोंग्रेस कर रही हैं. गोडसे बेचारे मुफ्त में बदनाम हुए. गांधी के नाम पे वोटो की भीख मांगकर सत्ता कब्जाने वाले नेहरू-गांधी परिवार ने कदम-कदम पर गांधी जी के मूल्यों की धज्जियां उडाई हैं. देश को लूटकर स्विस बैंको और इटली में धन भेजा जा रहा है. क्या गांधीजी देश का यह हाल देख पाते ?? अन्ना हजारे जैसे असली गांधीवादी का कोंग्रेस सरकार और सोनिया क्या हश्र कर रही है यह दुनिया देख रही है. आज गांधी ज़िंदा होते तो कोंग्रेसियो और गांधी-नेहरू के इतालवी कर्णधारों की हरकते देखकर खुद आत्महत्या कर लेते.
    भाई गांधीजी रोज मरते हैं अपने ही कपूतो के हाथो. इसीलिये देश में अब गांधी पैदा नहीं होते, सिर्फ नामधारी गांधी पैदा होते हैं, जो अमेरिका-इटली से प्रेरणा पाते है, ना कि गांधी के ग्राम स्वराज्य या सत्यवादी चरखे से.

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  3. जो कहा जा रहा है उसकी सम्भाना न के बराबर है फिर भी इस विषय में जांच करके दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिये।

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