शुक्रवार, 15 जनवरी 2010

बहुत कुछ पाया २६ वें साल में...

मकर संक्राति पर्व के दिन २६ बसंत पार कर चुका हूं। साथी पार्टी लेने की जिद पर अड़ गए। लेकिन, मुझे इस दफा पार्टी देने का कोई कारण नजर नहीं आया। अच्छा मेरा ऐसा कोई ऐसा दोस्त सामने नहीं आया जिसे असल में मेरे जन्म दिन की खुशी हो। अगर ऐसा होता तो पार्टी मांगने की जिद करने की अपेक्षा पार्टी दे भी तो सकता था। हां दो लोगों ने कहा था जिनमें से एक की तो बहुत तबियत खराब हो गई और दूसरे को मैंने मना कर दिया। मैं भी इस बार ढ़ीठ बना रहा पार्टी नहीं देना दी तो नहीं दी। क्योंकि इस दफा मैं अपने जन्म दिन को मस्ती दिवस में नहीं गवाना नहीं चाहता था, इसे मैं चिंतन दिवस के रूप में लेना चाहता था। और मैंने किया भी वही। सोचा और पीछे मुड़कर देखा तो मैंने पाया कि यह वर्ष मेरे लिए लाया तो बहुत कुछ था। बहुत बातें समझ में आईं। असल में कहूं तो जिंदगी के इस एक साल ने बहुत कुछ सीखने का अवसर दिया। जो मैं आज तक नजरअंदाज करता रहता था, उस पर इस वर्ष मेरी नजर रही। रोज मेरे माथे पर अलग-अलग भाव रहते थे जिसे कोई भी वह बंदा देख सकता था जो मेरे जैसा हो। साथ ही असफलताओं ने नए पाठ पढ़ाए। किसी ने उम्मीदें तोड़ी तो किसी ने उम्मीदें जगाईं और किसी ने उम्मीद से बढ़कर मेरे लिए किया। हालांकि मैं किसी से कोई उम्मीद नहीं रखता। जो मुझे ठीक लगता है करता हूं और जो ठीक नहीं लगता नहीं करता। इसलिए किसी से उम्मीद रखने का कोई प्रश्र ही नहीं उठता। मैं जो करता हूं अपने मन को प्रसन्न रखने के लिए करता हूं। उसी में मेरा हित, समाज का हित और मेरे अपने और गैरों का हित छुपा हुआ हो सकता है।
इस साल मैंने जिंदगी के नए सफर के लिए कदम बढ़ाए। जीवन की नैया चलती रहे सो नौकरी पाने के लिए खूब भाग-दौड़ की। जबलपुर तक राउंड मारा। वहां आश्वासन भी मिला और नौकरी का ऑफर भी लेकिन अपुन को जमा नहीं या कह सकते हैं कि उससे पहले मुझे कहीं और अवसर मिल गया। असल में सितंबर नवदुर्गा महोत्सव के दौरान मेरी किस्मत और आदरणीय मानव जी (दैनिक भास्कर के समाचार संपादक डॉ. संतोष मानव) ने मुझे ग्वालियर दैनिक भास्कर में काम करने का अवसर उपलब्ध कराया। इसके लिए मैं सदैव उनका आभारी रहूंगा। मेरी किस्मत थोड़ी अच्छी है तभी मुझे बेहतरीन साथीयों का सहयोग मिला। भास्कर की सेटेलाइट टीम में मेरी नियुक्ति हो गई। सेटेलाइट टीम के कप्तान आदरणीय श्री रमेश राजपूत का मार्गदर्शन मुझे हर रोज नई दिशा देता रहा और रहेगा भी क्योंकि वे बेहतरीन कप्तान हैं। साथियों का हौंसला कैसे बुलंद रहे अच्छी तरह से जानते हैं। मेरे साथियों ने कभी भी मुझे किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी। श्री संजय सिंह जी, श्री अवधेश जी श्रीवास्तव, श्री अनिल जी श्रीवास्तव, श्री मनीष जी पिसाल और श्री सुरेंद्र मिश्रा जी सबने समय-समय पर साथ दिया, हौंसला बढ़ाया और आगे बढऩे की राह दिखाई। बहुत कुछ सीखा मैंने अपने इन नए साथियों से और सीख रहा हूं। मैं भाग्यशाली ही हूं कि मुझे अपने करियर के शुरूआत में ही इतने अच्छे लोगों का साथ मिला। यही सबसे बढ़ी उपलब्धि मिली इस वर्ष।
और तो बस सीखा चलते हुए, ठोकर खाते हुए। अभी बहुत लम्बा रास्ता है। उसमें काम आएगा इस वर्ष का सीखा हुआ।

3 टिप्‍पणियां:

  1. ओह, इस बार तो हम पार्टी से चूक गए!
    अगले वर्ष की बुकिंग अभी से करवा देना भई :-)

    तारीख खतम होते होते आपको बधाई व शुभकामनाएँ
    आपका डाटा भी हमने यहाँ जोड़ लिया

    बी एस पाबला

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