मंगलवार, 22 दिसंबर 2009

ये पाकिस्तान कहाँ से घुस आया

रमैया- ये कक्का एक बात पूछें तुमसे.. चार-छ: दिन से बहुत ही परेशान हैं समझ ही नहीं आ रही।
पंचू- पूछो का बात है जो तिहाए भेजा में ना घुस रही।
रमैया- अरे कछू नाहीं है बात तो एक बिलान भरी है मतलब बहुत ही छोटी है पर तुम तो जानत हो हमाओ दिमाग तो बऊ ते छोटो है। जे बड़े-बड़े बुद्धिजीवियों की भांति नाहीं चलत है।
पंचू- हां बा तो हम सब जानत हैं हम। तुम तो अपनी बात बताओ का दिक्कत आ गई।
रमैया- कछु नाहीं है बा बात ए सोच-सोच के हमारो दिमाग भन्ना गयो मतलब चक्करघिन्नी हो जा रहो है। बात असल में जो है कि जो पार्षदी के चुनाव भए ना अभे। वही में शिवपुरी जिला की एक खबर है जो हमने एक नहीं सगरे अखबारन में पढ़ी और हमाए रिश्तेदार ने भी बताई।
पंचू- का पढ़ लओ तेने जो तेओ दिमाग चकरघिन्नी हो रहो है।
रमैया- का भयो कि शिवपुरी के दो अलग-अलग वार्र्डों से कांग्रेस के टिकट पर इरशाद पठान और आजाद खां अज्जू ठाडे भए हते। तो उनमें से इरशाद तो जीत गए और आजाद खां हार गए। आजाद अपनी हार से भुन-भुनाए बैठे हुए थे। उन्हें हराने वाली भाजपा की मीना बाथम का जुलूस शाम के निकर रहो थो जुलूस तो जुलूस होतो है। बामें तो खूब फटाके फटाते हैं और ढ़ोल-ढमाका भी खूब होता है। अब तो बा और आ गयो है का कहत हैं बासे... हां डीजे। तो मीना बाथम ेके कारकर्ता निकार रहे थे जुलूस धूम-धमाके से तबहीं आजाद खां जो हार से जला-भुना बैठा था निकर आया घर से और बोलन लगो कि जुलूस हमारे घर के आगें से नहीं निकरेगो... विरोधा-विरोधी में बात यहां तक पहुंच गई की नौबत हाथा-पाई तक आ गई।
पंचू- तो फिर का भयो?
रमैया- फिर का होतो उधर तो भीड़-भाड़ थी ही माहौल गरमा गया। दोओ पक्ष के लोग जुर गए। मामले ने सांप्रदायिक रंग लेना शुरू कर दिया। अब है बात परेशान करने वाली एक ओर जहां जय श्री राम और भारत माता की जै के नारे लग रहे थे तो दूसई ओर से पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लग रहे थे।
पंचू- अरे.. राम राम
रमैया- हां कक्का जई तो समझ में नहीं आ रही कि जै पाकिस्तान कहां से गुस आया बीच में? और आजाद के भैय्या ने भी तो रैली निकाली थी तब तो ऐसे कछु भओ नहीं। हां तनिक विरोध तो उधर भी हुआ था पर ज्यादा हो-हल्ला नहीं भयो। न तो मारा-पीटी भई ना गाली-गलांैज भई और ना सांप्रदायिक झगड़े की नौबत आई। फिर इते काए ऐसो भयो? बहुत दिमाग घूम रहो है कछु पल्ले नहीं पड़ रहो।
पंचू- रमैया रे। जै बात तो काफी गहरी लग रही है। भैय्या जां तो म्हारो दिमाग भी भन्ना गयो है, हमऊं जई सोच में पड़ गए की जो पाकिस्तान कहां से घुस? अरे बिन्ने जय श्री राम के नारे लगाए और भारत माता की जै बोली तो जेऊ अल्ला हो अकबर का नारा लगा लेते पर पाकिस्तान की जै काए बोली? हमारे समझ में तो नहीं आ रही। रहने दे रमैया अभी कछु बात नहीं करो जा मामले में अगर कछु कहेंगे तो अपुन भी सांप्रदायिक घोषित हो जाएंगे समझे।
रमैया- सई कह रहे हो पंचू कक्का जो तो सही बात है उनकी हरकतों पर जो तुमने ऊंगली उठाई सोई तुम दीन-हीन, छोटी सोच के लोग हो जाओगे रहन देते हैं दिमाग को का है भन्नात रहेगो। अच्छा एक बात और है?
पंचू- तू ऐसी ही बात लेकें आतो है। अब का है?
रमैया- जे है कि वन्देमातरम कहबे में तो इनको धर्म भ्रष्टï हो जातो है जे काफिर हो जाते हैं धरती की जै बोलवे में फिर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगावे में जे धर्मच्युत नहीं होत का?
पंचू- हे मौडा रहन दे तू अबाहल कोई बुद्धिजीवी इते आ गयो और बाने जे सब बातें सुन लर्ईं तो तेरो और मेरो भेजो फ्राई कर देगो समझत काए नाने तू। माना मेरे भैय्या मान जा। और कछु हो तो बोल....
रमैया- ला भैय्या एक बीड़ी पिला दे......
पंचू- जै ले दो निकार ले जा बिंडल में थे एक मेरे काए जला दिओ और एक तू ले ले। राहत मिलेगी नहीं तो दिमाग फट जागो जा बात के बारे में सोचत-सोचत के जै पाकिस्तान कहां से घुसो आयो।

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढिया भईया लगे रहो.

    हौसला ही हौसला लो हमसे ट्रैक्‍टर भर भरके.


    धन्‍यवाद भाई.

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  2. भाई बात तो सही कही कि पाकिस्तान कहां से आया। इस तरह की सांप्रदायिक से हमारा मुल्क पचास सालों से जूझ रहा है। ऐसे ही सामुदायिक टकराव और वैमनस्य को दूर करने का समाधान पाकिस्तान के निर्माण के रूप में खोजा गया था लेकिन वह समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण अशिक्षा ही असमानता है। पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने वालों को नहीं पता कि पाकिस्तान कैसा हैं क्या हैं और वहां क्या हालात हैं लेकिन कुछ धर्म के ठेकेदार
    और कंट्टरपंथी अपनी राजनैतिक हित साधने के लिए समुदायों के बीच खाई बनाने के लिए प्रायोजित तरीके से ऐसे कृत्य करवाते है ताकि चुनाव में वोटरों का धुर्वीकरण किया जा सके। और मुद्दों आम जनता ध्यान भटकाकर धर्मिक सहानुभूति और भय से वोट कबाड़े जा सकें।

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  3. एक बड़ी समस्या को जिस नाटकीय टंग से प्रस्तुत किया है उसके लिए बधाई
    लेकिन एक पत्रकार होने के नाते तुम्हें इस समस्या का समाधान भी अपने नजरिए से बताना चाहिए था।

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